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ख्वाब तो मैंने बहुत देखे है, लेकिन दिल लगा कर खेले हुए बरसों बीत गए. शब्द बड़ी आसानी से निकलते है मुह से, मन मे महल बड़ी आसानी से बनते है, लेकिन डाव लगता नही है मुझसे, ज़ंग लड़ी नही जाती, मंजिल तै नही कर पता हूँ मैं - लाब्जों की दीवारों के पीछे छुपकर मुकर जाता हूँ मैं. हारना तो मैं जानता ही नही हूँ - मैंने खेलना ही कहाँ सीखा है ! ख़यालों मे खोया, फ़र्ज़ निभाना भूल चूका हूँ मै. बडे दिन हुए सिर उठाके चले हुए - हर मोड़ पे गलत रास्तों पर बिखर जाता हूँ मैं.
"हजारों ख्वाहिशें ऐसी
की हर ख्वाहिश पे दम निकले,
बहुत निकले मेरे अरमान
लेकिन फिर भी काम निकले . . "
की हर ख्वाहिश पे दम निकले,
बहुत निकले मेरे अरमान
लेकिन फिर भी काम निकले . . "

3 comments:
Phoddu !!
atrocious hindi spelling...you suck!!!
:)
I found it quite tough to write in hindi on blogger.
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